हमारी आज की किताब है “Who Move My Cheese”। इसके लेखक Spencer Johnson एक अमेरिकन doctor और एक मनोवैज्ञानिक (psychologist) भी है। इन्होंने कई और किताबें भी लिखी हैं “Out of Maze”, “One Minute Manager series”, “Yes or No” आदि। ये “Harvard Business school” में professor भी रहे हैं।
“Who Moved My Cheese” इस किताब की theme है, बदलाव को प्रत्याशित (anticipate) और adopt करना। ये एक कहानी है 4 चरित्रों के बारे में जिनका नाम है Hem, Hough, Sniff और Scurry, जिनमें से Sniff और Scurry दो चूहे है और Hem और Hough दो इंसान है। ये चारों एक भूल-भुलैया में रहते हैं और अपने cheese की तलाश करते हैं।
ये एक ऐसी किताब है जो हमें बदलाव को प्रत्याशित (anticipate) करना सिखाती है। Spencer Johnson ने इसे काफ़ी अच्छे से narrate किया है, ये हम सबके जीवन से relate करती है। अगर हम इस कहानी से कुछ सीख भी अपने जीवन में लगा पाए तो हमें काफी बड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। इस किताब की 26 million copies पूरी दुनिया में 37 भाषाओं में बिक चुकी है। ये किताब New York Times की best seller भी रही है और कई लोगों के जीवन पर इस किताब ने positive impact डाला है।
कहानी
एक तरह से ये कहानी मानव प्रवृत्ति (human tendency) को भी समझाती है, कि किस तरह लोग अपने comfort zone में फंसकर रह जाते हैं और आने वाले बदलाव को नहीं देख पाते और फिर बदलाव को देखते हुए भी उनके अनुसार अनुकूलन नहीं कर पाते या फिर उनको पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं और fail हो जाते हैं।
Characters – इस कहानी में दो चूहे है, Sniff और Scurry, इनकी smelling ability का इस्तेमाल करके ये भूल भुलैया में चक्कर लगाते हैं और cheese ढूंढते है। कहानी में बहुत कुछ है इनसे सीखने को।
Hem और Haw नाम के दो चूहे की size के इंसान है। सोचने की क्षमता, पिछली गलतियों से सीखने की क्षमता उनके पास है और ये उसका उपयोग करके cheese ढूंढते हैं पर कैसे वो भूल भुलैया में फंसते है, ये कहानी में हम आगे देखेंगे।
भूल भुलैया – इस कहानी में जिसे भूल भुलैया कहा गया है, वो real world के finance और social traps है जिनमें हम फंसकर रह जाते हैं।
Cheese – cheese हमारी इच्छा है जो की बढ़ती जाती है। ये हमारा वित्तीय लक्ष्य हो सकता है, सामाजिक लक्ष्य हो सकता है।

हमारी भूल-भुलैया हमारा office या कार्यस्थल हो सकता है, समाज हो सकती है या संबंध हो सकती है, और हमारा cheese वो चीज है जिसे हम हासिल करना चाहते हैं। पर एक बार हम जैसे ही उसे हासिल कर लेते हैं, हमको उसकी आदत पड़ जाती है और जब ये हम से दूर हो जाती है तो हम दुखी और परेशान हो जाते हैं क्योंकि हम इसके लिए तैयार नहीं होते हैं। फिर हम इसके लिए बैठ कर regret करते हैं बजाय action लेने के और ये बात इस किताब में explain की गई है। लगातार बदलाव भी अक्सर मुश्किल होता है लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल होता है पछतावा करना।
Sniff और Scurry दो चूहे थे और Hem और Haw दो छोटे आदमी थे। यहाँ पर Hem और Haw मानव व्यवहार का प्रतिनिधित्व (represent) करते हैं। हर रोज दोनों चूहे और दोनों लोग भूल-भुलैया में अपने cheese को ढूंढते। Hem और Haw को लगता था की जैसे ही उनको cheese मिलेगा, उनका जीवन सफल हो जाएगा। जैसे की हम इंसान की आदत होती है, हम भी यही सोचते हैं कोई मुश्किल लक्ष्य हासिल कर लेने पर हमारी जिंदगी सफल हो जाएगी (Who Moved My Cheese)।
Sniff और Scurry अपनी नाक से गंध का अंदाज लगाते और उसी दिशा में भागते जिस तरफ से गंध आ रही हो। इस कोशिश में वो लोग कई बार गुम हुए, दीवारों से टकराए भी और गलत दिशाओं में भी चले गए (Who Moved My Cheese)।
दुसरी तरफ Hem और Haw अपने सोचने की सकती और पुराने अनुभव की मदद से cheese ढूंढते। कई बार fail हुए और कई बार भटके भी (Who Moved My Cheese)।
आखिरकार, अपनी-अपनी कोशिश से सबको एक cheese मिल ही गया, जिसका नाम था cheese station “C”। उसके बाद रोज सुबह चूहे और छोटे लोग station C में पहुंच जाते और अब ये ही उनका daily routine हो गया। यहां पर हम अपनी daily life को इससे relate कर सकते हैं, जिस तरह हम daily office के लिए या sailing के लिए या किसी और काम के लिए daily routine set कर लेते हैं, और इसी में फंस कर रह जाते है (Who Moved My Cheese)।
Sniff और Scurry रोज सुबह जल्दी उठते और station C पर पहुंच कर अपने जूते को गर्दन में बांधकर cheese का मजा लेते जबकी Hem और Haw थोड़ी देर से बढ़ते हैं, कपड़े पहनने में ज्यादा समय लगाते और धीरे-धीरे Station”C” की तरफ जाते। यहां पर हम मानव से relate कर सकते हैं की जैसे हमें कोई उपलब्धि मिलने पर हम उसे for granted ले लेते है और इसी में comfortable हो जाते हैं और यह हमारी lifestyle में शामिल हो जाता है (Who Moved My Cheese)।
जैसे ही Hem और Haw station “C” पर पहुंचते हैं, वो अपने जूते उतार देते और चप्पल पहन लेते और बड़े आराम से cheese को enjoy करते हैं। वो लोग दिन पे दिन आरामतलब होते जा रहे थे, उन्होंने कभी cheese पर गौर नहीं किया की ये cheese यहां आया कैसे और ये यह भी सोचते की इस cheese से तो हमारी पूरी जिंदगी निकल जाएगी। दोनों अपने आपको बहुत ही खुश और कामयाब महसूस कर रहे थे। Station C के पास ही अपना घर बना लिया और अपने घर को कहावतों से सजाना शुरू कर दिया (Who Moved My Cheese)।
पहली कहावत इन्होंने लिखी:
“जब आपके पास cheese हो तो आप खुश रहते हैं।”
वो कहते, हमें ये cheese मिलना ही चाहिए था क्योंकि इसे पाने के लिए हमने बहुत मेहनत की है। ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और Hem और Haw का आत्मविश्वास अब घमंड बन चुका था। वो इतने comfort हो गए की वो अनुमान ही नहीं कर पा रहे थे कि आस-पास क्या हो रहा था। हम इंसान भी उन्हीं की ही तरह तो है, हम भी अच्छा वक्त आने पर enjoy करते हैं, और अच्छे वक्त में हमें यह पता ही नहीं चलता की आस-पास क्या हो रहा है, और हम बदलाव को देख नहीं पाते (Who Moved My Cheese)।
दुसरी तरफ Sniff और Scurry दोनों ने अपने दैनिक दिनचर्या को जारी रखा, वो रोज के रोज station C , cheese enjoy करते हुए, इसका चक्कर काटकर निरीक्षण करते और देखते की कहीं कल से आज के बीच कुछ बदला तो नहीं और फिर चले जाते। एक सुबह Sniff और Scurry cheese station C पर पहुंचे और उन्होनें देखा की cheese वहां नहीं है। उनको हैरानी नहीं हुई क्योंकी वो देख रहे थे हर रोज cheese कम हो रहा था और वो लोग बदलाव के लिए तैयार थे (Who Moved My Cheese)।
संक्षेप में (in short), वो लोग बदलाव को प्रत्याशित (anticipate) कर रहे थे और वो लोग अब ये भी जानते हैं की अब उनको क्या करना चाहिए। उन्होंने अपने गले में बंधे जूतों को खोला और पहन लिया, बिना किसी वक्त को बर्बाद किए बिना सोचना शुरू किया। खुद को बदलने का फैसला किया और भूल भुलैया में cheese ढूंढने के लिए निकले। यहां पर हमारे लिए एक lesson है की हमें Sniff और Scurry की तरह तार्किक सोच रखनी चाहिए और हालात को देखते हुए action लेना चाहिए और हो रहे बदलाव पर भी नजर बनायें रखनी चाहिए (Who Moved My Cheese)।
लापता cheese
बाद में Hem और Haw station C पहुंचे। वो लोग उम्मीद लगाये थे की cheese वही पे होगा जहां हमेशा होता था। होने वाले बदलाव के लिए वो लोग बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। जैसे ही उन्होंने देखा की cheese अब वहां नहीं है, Hem चिल्लाया- क्या ?? cheese नहीं है, कहां गया? वो किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहा था की जैसे कोई cheese को वापस रख देगा। वो ज़ोर से चिल्लाया- मेरा cheese किसने हटाया? उसका चेहरा लाल हो गया और वो चिल्लाया, यहां कौन है, Haw ने भी अपना सर हिलाया। दोनों को shock लगा था क्योंकि दोनों इस बड़े बदलाव के लिए तैयार नहीं थे (Who Moved My Cheese)।
बिलकुल मानव जैसा, हम भी अच्छा पैसा आने पर या business में अच्छा करने पर आश्वासन हो जाता कि अब ये पैसा और ये business हमसे कोई नहीं छीन सकता है और ये पूरी जिंदगी भर के लिए काफ़ी रहेगा। जिसका नतीजा है की बड़ी-बड़ी companies जो किसी समय पे market को हावी (dominate) करती हैं, आज पूरी तरह से market से बाहर हो चुकी है, क्योंकी वो खुद को बदलना नहीं चाहते थे या फ़िर यू कहे की बदलाव को देखते हुए भी अनदेखा कर देने की आदत उनके business को ले डूबी (Who Moved My Cheese)।
Cheese को खो देना दोनों Hem और Haw के लिए आसान नहीं था क्योंकि दोनों को ऐसी आदत पड़ गई थी और उनका shock होना natural था। उनको पता था की cheese का होना उनके लिए कितना महत्व रखता था। Daily जीवन में हम इंसानों के लिए ये cheese ऐश-आराम हो सकता है, अच्छी health हो सकती है, अच्छा social status हो सकता है (Who Moved My Cheese)।
Hem और Haw रोने में और दुखी होने में अपना वक्त गवां रहे थे जबकी Sniff और Scurry भूल भुलैया में आगे बढ़ते जा रहे थे। Hem और Haw निराश हो गए, उन्होंने इस station C के आस-पास आने वाले कल के कई सपने बन लिए थे। उनको तो पूरी तरह से अनुचित लग रहा था की बिना किसी चेतावनी के उनसे उनका cheese छीन लिया गया। आज रात को Hem और Haw दोनों भुखे ही अपने घर को लोटे पर जाने से पहले उन्होंने दिवार पर लिखा:
“आपका cheese आपके लिए जितना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, आप उतना ही ज्यादा इसे जकरे रहना चाहेंगे”।
अगले दिन दोनों Hem और Haw एक बार फिर station की तरफ निकले। उन्हें उम्मीद थी की आज उनको cheese फिर से वही मिल जाएगा, लेकिन वहां पहुंच के उन्होंने देखा की वहां पर कुछ भी नहीं बदला था। वहां कोई cheese नहीं था, वो समझ नहीं पा रहे थे क्या किया जाए। वो लोग कुछ भी सुनना या समझना नहीं चाहते थे। वो ये बात स्वीकार करना ही नहीं चाहते हैं कि cheese अब वहां नहीं है। Hem ने बार-बार निरीक्षण किया पर कोई नतीजा नहीं निकला। तभी Haw बोला, Sniff और Scurry कहां है, क्या तुम्हें लगता है कि उनको ऐसा कुछ पता है जो हमको नहीं पता (Who Moved My Cheese)।
Hem बोला – वो सिर्फ चूहे है, और हम इंसान है, हम ज्यादा खास है, इस बात का फायदा हमें मिलना ही चाहिए और हम इसके हकदार है (Who Moved My Cheese)।
Haw ने पूछा – हम कैसे इसके हक़दार हुए?
Hem – क्योंकि हमारी वजह से ये cheese गायब नहीं हुआ, किसी और ने इसे गायब किया है, इसलिए हमें ये वापिस मिलना ही चाहए (Who Moved My Cheese)।

Haw ने सुझाव दिया- शायद हमें इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए और नए cheese की तलाश शुरू कर देनी चाहिए, जो चला गया सो चला गया (Who Moved My Cheese)।
लापता cheese ढूँढना
Hem बोला – नहीं, मैं पता कर के रहूंगा की ये यहां से गायब हुआ तो हुआ कैसे।
जब तक Hem और Haw चर्चा में वक्त बर्बाद कर रहे थे, Sniff और Scurry भूल भुलैया में आगे बढ़ते जा रहे थे और नया cheese ढूंढने की कोशिश कर रहे थे। जहां भी उन्हें लगता है कि यहां cheese मिलने की संभावना है, वो लोग वहां पर जाते और cheese ढूंढते हैं। वो लोग नया cheese ढूंढने के अलावा कुछ और नहीं सोच रहे थे और आखिरकार वो लोग एक जगह पहुंच ही गए जहां तक वो कभी नहीं गए थे और वहां पर पहले से भी बड़ा cheese पड़ा था और वो station का नाम था station N, वो बहुत खुश हुए कयोंकि उनको जिनकी तलाश थी वो आखिरकार उन्हें मिल ही गया (Who Moved My Cheese)।
इस बीच Hem और Haw अब भी station C में ही बैठे थे। वो लोग परेशान और निराश होकर इसके लिए एक दूसरे को कोश रहे थे। Haw सोच रहा था की शायद Sniff और Scurry ने नया cheese ढूंढ लिया होगा। वो जानता था कि ये काम आसान तो बिलकुल नहीं होगा क्योंकि भूल भुलैया में खो जाने का खतरा तो है ही पर वो ये भी जानते थे की ये परेशानी कुछ वक्त के लिए ही होती है।
वो सोचे की Sniff और Scurry को अपना cheese मिल चुका है और वो इस्तेमाल कर रहे हैं और आनंद ले रहे है। वो भूल भुलैया में रोमांचक सफर पर जाने के बारे में सोचता और रोमंचित हो उठता। जितना वो नए cheese को पाने के बारे में सोचते, उतना ही वो station C को छोड़ने के बारे में सोचने लगते, “चलो चलते हैं” – Haw ने कहा (Who Moved My Cheese)।
“नहीं” – Hem ने कहा, मुझे ये जगह पसंद है, ये आरामदेह है, जानी पहचानी है, और इससे बाहर बहुत खतरा है। यहां पर human की tendencies दिखाई जा रही है की कैसे हम लोग अपने comfort zone को छोड़ नहीं पाते, grow नहीं कर पाते कयोंकि comfort zone आरामदेह होता है, जाना पहचाना होता है, और इससे बाहर जाने में खतरों का सामना करना पड़ सकता है (Who Moved My Cheese)।
“नहीं” Haw ने कहा- “हम पहले भी भूल भुलैया में cheese ढूंढ चुके हैं और हम फिर ऐसा कर सकते हैं। यहां पर Haw अपने growth mindset से ये सब सोच रहा है जैसा कि हमें भी करना चाहिए (Who Moved My Cheese)।
“उसके लिए मैं बहुत बुढ़ा हो चुका हूं”, Hem ने कहा “और मुझे डर है की फिर से cheese ढूंढने अगर मैं बाहर भूल भुलैया में गया और मुझे अगर कोई नई cheese नहीं मिला तो लोग मुझे मूर्ख बोलेंगे। क्या तुम खुद को मूर्ख कहलाना पसंद करोगे”?हम humans भी इसी तरह की सोच में फंसकर रह जाते की अगर हमने कुछ नया try किया और हम कामयाब नहीं हो पाए तो हम खुद की नजर में और दुनिया की नजर में मूर्ख साबित हो जाएंगे (Who Moved My Cheese)।
ये सुनते ही fail होने का डर लौट आया और दोनों की cheese को ढूंढने की उम्मीद और हिम्मत टूट गई (Who Moved My Cheese)।
Cheese का इंतजार
इसके बाद वो रोज station C पर जाते और cheese न देख कर निराश होकर घर लौट आते हैं। उन्होंने अब पाया की भुख की वजह से नींद आना अब मुश्किल होता जा रहा है, वो लोग अब पहले से कमज़ोर हो चुके थे मानसिक रूप से भी और शारीरिक रूप से भी। हम इंसान की तरह, जैसे ही हमें comfort zone की आदत लग जाती है और अब Comfort zone से निकलने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है पर हम अपने डर के वजह से वहां से निकल भी नहीं पा रहे है (Who Moved My Cheese)।
पर अब ये लोग रोज के रोज वहां जाते हैं और वहां बैठकर अपने cheese का इंतजार करते हैं। Hem को अब भी लग रहा था की अब भी कुछ नहीं बदला है, अभी भी अगर हम आस पास कोशिश करें तो cheese कहीं आस पास ही होना चाहिए या हो सकता है किसी ने उसे दीवार के पीछे छुपा दिया हो। अगले दिन Hem और Haw दोनों tools लेकर आए (Who Moved My Cheese)।
हथौरो से मारकर उन्होंने station C में छेद कर दिया और अंदर झाँक कर देखा तो वहां पर कुछ भी नहीं था। वो निराश थे पर उनको लगता था की इसका हल निकल सकता है, इसलिए उन्होंने जल्दी आना, देर तक रुकना और ज्यादा मेहनत करना शुरू किया। यहां हम देख सकते है की hem और Haw ने एक fixed mindset के according काम करना शुरू किया है जो की बहुत हानिकारक है।
अब Haw को करने और काम को सही से करने के बीच में फर्क समझ में आ रहा था, पर Hem हमेशा ये कहते हैं हम यही बैठकर इसका इंतजार करेंगे कि शायद जिसने भी हमारा cheese यहां से उठाया है, उसको वापिस रखना ही पड़ेगा। Haw इस बात पर भरोसा करना चाहता था पर मन ही मन वो भी ये जानने लगा था की ऐसा कुछ होने वाला नहीं है।
दोनों भूख के कारण अब कामजोर हो चले थे और Haw को अब ये महसूस होने लगा था की जितना ज्यादा वक्त वो यहां गुजारेंगे उनकी हालत बिगड़ती चली जाएगी। वो मन ही मन ये महसूस करने लगे थे कि स्थिति अब उनके हाथ से निकलती जा रही है (Who Moved My Cheese)।
गलती का एहसास
आखिरकर उसको अपनी गलती का एहसास हुआ और एक दिन वो खुद पर हंसने लगा “ओह हो , मेरी तरफ देखो, मैं अब तक बार-बार वही करता रहा जो की मैं अब तक करता आया हूं और मैं ये उम्मीद लगा रहा था की हालात सुधरेंगे, और मैं हैरत में पड़ रहा था की कुछ भी ठीक क्यों नहीं हो रहा था, कितनी मजे कि बात है और बेवकुफी भरी भी (Who Moved My Cheese)।”
Haw इस बात से डरा हुआ था की अगर वो भूल भुलैया में गया तो वो गुम हो जाएगा, ना ही वो ये जानता था की cheese कहां मिलेगा उसे। पर जब उसने महसूस किया कि उसका डर उसको आगे बढ़ने से रोक रहा है तो उसको अपनी गलती समझ में आई। हम इंसान में कुछ लोग ही होते है जो कि Haw की तरह situation ko analyze करते है और accordingly action लेते है। पर successful होने के लिए ये एक बहुत जरूरी factor है (Who Moved My Cheese)।
Haw ने अपने jogging dress और running shoes पहने। Hem ने उसे ये सब करते हुए देखा तो पूछा की कहीं तुम भूल भुलैया में जाने के बारे तो सोच रहे हो? तुम यही रुक कर इंतजार क्यों नहीं करते जब तक की वो लोग हमारा cheese नहीं रख देते जिन्होंने इसको गायब किया है (Who Moved My Cheese)।
“क्योंकी तुम ये नहीं समझ रहे हो” Haw ने कहा” – मैं भी ये बात नहीं समझ पा रहा था पर अब मैं ये जान चुका हूं की वो लोग कभी भी cheese को नहीं रखेंगे। जो गुजर गया वो कल का cheese था, अब नया cheese ढूंढने का वक्त है।”
Hem ने कहा – पर अगर तुम बाहर गए और फिर भी तुम्हें cheese ना मिला तो फिर ये भी हो सकता है कि वहां कोई cheese हो ही ना (Who Moved My Cheese)।
Haw ने कहा – मैं नहीं जानता, पर एक ही जगह बैठने से भी इस समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला है। हमें आगे बढ़ना ही चाहिए, कयोंकि ये ही जिंदगी है, जिंदगी आगे बढ़ती है और हमें भी बढ़ना चाहिए (Who Moved My Cheese)।
Haw ने Hem को समझाने की कोशिश की पर अब तक Hem का डर गुस्से में बदल चुका था और वो कोई बात सुनने को तैयार नहीं था। Haw को इस बात पर हसीं आई की वो दोनों कितने मुर्ख लग रहे थे। जैसे ही Haw चलने को तैयार हुआ, उसे महसूस हुआ की उसमें ताकत आ गई है क्योंकी उसे अपनी गलती का एहसास था और वो नए adventure पे जाने को तैयार था। Haw ने एक पत्थर उठाया और दीवार पे एक विचार लिखा, इस उम्मीद में की Hem इसको पढेगा तो वो भी inspire होके उसके साथ चल पड़ेगा, और वो विचार था:
“अगर आप नहीं बदलते हैं, तो आप बर्बाद हो सकते हैं।”
बाहर निकलना
Haw ने अपना सर बाहर निकाला और भूल भुलैया की तरफ देखा, उसे यकीन नहीं हो रहा था की कैसे वो इतने दिनों तक यहां पे फंसा रहा। पहले वो ये सोच रहा था की भूल भुलैया में कोई cheese नहीं होगा और अगर होगा भी तो वो इसे ढूंढ नहीं पाएगा और ये डर उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहा था (Who Moved My Cheese)।
Haw जानता था की Hem अब भी यही सोच रहा होगा की “मेरा cheese किसने हटाया” पर वो इस बात पे हैरान भी था की मैं जल्दी क्यों नहीं जागा, और आगे क्यों नहीं बढ़ा (Who Moved My Cheese)।
अब वो भूल भुलैया में आगे बढ़ा, पीछे पलटकर देखा तो लगा की इसमें कोई शक नहीं की ये जगह ज्यादा आरामदेह और जानी पहचानी थी और उसे अब भी उस जगह से लगाव था।

उसने फिर सोचा की क्या सचमुच में वो भूल भुलैया के अंदर जाना चाहता है? फिर उसे सामने की दीवार पर एक कहावत लिखी:
“अगर आप डरते नहीं तो आप क्या करते।”
ये कहानी की सबसे मजबूत line है, अगर आप डरते नहीं तो आप क्या करते हैं, हमको जीवन में हमारा डर आगे बढ़ने से रोकता है, हमेशा और हमें उस stage पे खुद से सिर्फ एक question करना चाहिए की इस situation में अगर मैं डरता नहीं तो क्या करता। और शायद ये एक सवाल का जवाब हमको रास्ता दिखाने के लिए काफ़ी होगा (Who Moved My Cheese)।
वो जानता था की कुछ डर ऐसे होते हैं जिनके अच्छे नतीजे निकल सकते हैं। जब आप डरे हुए होते हैं तो situation और बिगड़ने लगती है, जब आप उसको सुधारने के लिए कुछ नहीं करते हैं (Who Moved My Cheese)।
उसने अपने right side देखा और उसे वो हिस्सा दिखाई दिया जहां वो पहले कभी नहीं गया था और उसे डर लगने लगा। उसने गहरी सांस ली और धीरे-धीरे भूल भुलैया में ढूंढना शुरू किया।
जब वो भूल-भुलैया में ढूंढ रहा था तो पहले तो ये चिंता हुई की station C पे बहुत समय बर्बाद कर दिया और इसने उसे कमजोर बना दिया है। अब उसे भूल भुलैया में ढूंढने में काफ़ी तकलीफ आ रही थी। उसने तय किया की अगली बार अगर जीवन में ऐसा मौका आएगा तो वो condition के हिसाब से खुद को जल्दी बदल लेगा। इससे जीवन ज्यादा आसान हो जाएगी, फिर उसने एक मुस्कान के साथ सोचा “कभी नहीं से डर भली” (Who Moved My Cheese)।
हमारे रास्ते में आने वाले परिवर्तनों पर काबू पाना
एक इंसान के रूप में हमको यहां Hem से सीखना चाहिए की डर को जीत कर हमें आगे बढ़ना चाहिए, और जीवन में आने वाली problems को face करने के लिए भी खुद को mentally तैयार कर लेना चाहिए। एक ही गलती को दुबारा दोहराने का कोई मतलब नहीं बनता और इससे पहले की हम आर्थिक रूप से या मानसिक रूप से कमजोर हो जाए, हमें आगे बढ़ कर उसका समाधान निकालने के लिए hustle करना चाहिए (Who Moved My Cheese)।
कुछ दिनों तक उसे थोड़ा बहुत cheese मिलता रहा पर वो काफ़ी नहीं था। उसे उम्मीद थी की उसे जल्दी ही एक बड़ा cheese मिलेगा और फिर वो Hem के पास cheese लेकर जाएगा जिससे Hem inspire हो सके। Hem को परेशानी तो हो ही रही थी पर वो पहले से थोड़ा ज्यादा आत्मविश्वास से भर गया था। जब भी लगता की वो सही जा रहा है, वो रास्ते में भटक जाता। ये एक challenge था लेकिन मन ही मन उसे मानना पड़ा कि नए cheese को ढूंढना उतना बुरा भी नहीं है, जितना कि वो डर रहा था (Who Moved My Cheese)।
जब भी वो निराश होता, वो खुद को याद दिलाता की वो क्या कर रहा था। वो परेशान था पर फिर भी ये situation पहले से तो बेहतर ही थी। अब situation उसके काबु में थी और अब वो नसीब के भरोसे नहीं बैठा था।
उसने सोचा अगर Sniff और Scurry आगे बढ़ सकते है तो वो भी बढ़ सकता है (Who Moved My Cheese)।
उसने पिछली बातों को याद किया तो उसे महसूस हुआ की station C पे रखा हुआ cheese अचानक गायब नहीं हुआ था। Cheese आखिर में कम होने लगा था और उसका tase भी खराब हो चला था।
उसने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया था पर उसने ये माना की उसे इन चीजों से अनदाजा लगा लेना चाहिए था पर उसने ऐसा नहीं किया। हम इंसान को Hem से सीखना चाहिए कि हम भी ये बात accept कर ले की बदलाव होना तो तय है और हमें होने वाले बदलाव को feel करना पड़ेगा, और इनको notice कर उसके हिसाब से action भी लेना पड़ेगा (Who Moved My Cheese)।
Haw ने महसूस किया का उसे झटका नहीं लगता अगर वो पहले से ही अंदाज लगाना शुरू कर देता और नजर रखता तो आज सब कुछ उसके नियंत्रण (control) में होता, हो सकता है Sniff और Scurry ने ऐसा ही किया हो (Who Moved My Cheese)।
वो आराम करने के लिए रुका और उसने दीवार पर लिखा:
“चीज़ को हर रोज सूंघते रहे ताकी आपको पता चल जाए की ये सब बासी हो रहा है।”
यहाँ एक lesson है हमारे लिए की हमें ये अंदाजा लगा लेना चाहिए की जब हमारा business अच्छा perform नहीं कर रहा हो, या हम अपने जीवन में अच्छा perform ना रहे हो, तो तुरंत action लेकर उन्हें हल करना चाहिए।
Haw अब cheese ढूंढते हुए थक रहा था, उसकी ताकत कम हो रही थी। उसे लग रहा था की अब वो जिंदा नहीं बचेगा, उसने एक बार फिर से sation C की तरफ जाने के बारे में सोचा भी- लेकिन फिर उसने खुद से पूछा “अगर मैं डरता नहीं तो क्या करता?”
Haw अब काफ़ी डर चुका था, फिर उसने अपने सबसे अच्छे लम्हे याद किए जो उसने भूल भुलैया में आगे बढ़ते हुए बताए थे। फिर उसने दीवार पर लिखा:
“किसी नई दिशा में आगे बढ़ने से नया cheese खोजने में मदद मिलती है।”
उसने आगे देखा और अंधेरे को महसूस किया और सोचा- आगे क्या हो सकता है, हो सकता है ये खाली हो, या फिर वहां कोई खतरा भी हो सकता है (Who Moved My Cheese)।
फिर वो खुद पर हंसा और कहा की इन्हीं डर ने मुझे पहले भी रोका है और अभी भी ये मेरे साथ यही कर रहे हैं। उसने वही किया जो वो उस हालात में करता जब वो डरा हुआ नहीं होता। वो ये करना नहीं चाहता था पर अब वो पहले से ज्यादा confident था, अब वो इन हालात को आराम से लेने लगा था (Who Moved My Cheese)।
अपने आप को इतना खुश देखकर वो चक्कर में पड़ गया “मुझे इतना अच्छा क्यों लग रहा है”? उसने सोचा (Who Moved My Cheese)।
फिर उसने दीवार पर लिखा:
“जब आप अपने डर को जीत लेते हैं, तब आप आजाद महसूस करते हैं।”
जितना बुरा आप कल्पना करते हैं उतना बुरा कभी नहीं
Haw ये जान गया था की अब तक वो अपने डर के जाल में फंसा हुआ था, पर अब वो नई दिशा में चलने के लिए आजाद था। उसने भूल भुलैया की ठंडी हवा महसूस की, जिसने उसे ताजगी से भर दिया। वो अब भूल भुलैया में भी सकारात्मकता देखने लगा था। जैसे की हम इंसानों को देखना चाहिए, किसी नकारात्मक स्थिति में सकारात्मक देखना सीखना चाहिए)। उसने अपने डर को जीत लिया तो उसके लिए ये mission अच्छा साबित हो रहा था, सोच से भी ज्यादा (Who Moved My Cheese)।
Haw ने काफ़ी लंबे समय बाद ऐसी खुशी महसूस की, वो सब भूल चुका था की ये सब कितना मजेदार होता है (Who Moved My Cheese)।
हालात को बेहतर बनाने के लिए Hem ने अपने दिमाग में कल्पना करना शुरू किया। उसने खुद को अपने मन पसंद cheese के साथ उसके ऊपर बैठा हुआ देखा। उसने अपना मन पसंद cheese के टुकड़े खाते हुए खुद को देखा। लेखक यहां पर हम कल्पना की शक्ति समझा रहे है (Who Moved My Cheese)।
उसने cheese की साफ तस्वीर अपनी कल्पना में देखी और उसे ये सब असली लगने लगा, और उसे कुछ ज्यादा ही भरोसा हो गया खुद पर की अब तो वो इसे ढूंढकर ही रहेगा। उसने लिखा:
“पाने से पहले ही नए cheese का स्वाद लेने की कल्पना मुझे इसकी तरफ ले जाती है।”
“मैंने ऐसा पहले क्यों नहीं किया” Haw ने खुद से कहा, और वो भूल भुलैया में और ज्यादा तेजी से और ताकत से ढूंढने लगा। जल्दी ही उसे एक cheese station दिखा और वो खुश हुआ जब उसने दरवाजे पर छोटे-छोटे cheese के टुकड़े देखे।
उसने कुछ टुकड़े उठाए और चखे। वो बड़ी उम्मीद लेकर station में घुसा पर वो देख कर निराश हुआ की वहां कोई cheese नहीं था, कोई पहले ही वहां आ चुका था।
उसने सोचा की अगर वो जल्दी पहुंच जाता तो वहां पे काफ़ी cheese मिल सकता था (Who Moved My Cheese)। उसने ये फैसला किया की वो वापस जाएगा और Hem से पूछेगा की क्या वो उसके साथ चलने को तैयार है?
जब वो जाने ही वाला था तब वो रुका और उसने दीवार पर लिखा:
“जितनी जल्दी आप पुराने cheese को छोड़ेंगे, उतनी ही जल्दी आप नई cheese ढूंढ पायेंगे।”
कुछ समय बाद Haw फिर cheese station C की तरफ लौटा और Hem से मिला, और उसको cheese के टुकड़े देने चाहे पर Hem ने मना कर दिया।
Hem ने कहा – मुझे नए cheese की आदत नहीं है, मुझे अपना ही cheese चाहिए।
Haw ने अपना सर हिलाया और अकेले ही चल पड़ा भूल भुलैया में। वो उस बिंदू पर पहुंचा जहां तक पिछली बार पहुंचा था, अपनी दोस्तों की कमी महसूस हुई पर उसे ये भी महसूस हुआ की अब उसे मजा आ रहा है भूल भुलैया में। अभी तक बड़ा cheese का ढेर नहीं मिला था पर वो जानता था की सिर्फ cheese उसकी खुशी की वजह नहीं था (Who Moved My Cheese)।
वो खुश था क्योंकि वो अपने डर को जीत चुका था। वो जो कर रहा था वो उसमें खुश था। सिर्फ इस एहसास से की वो अपने dark को खुद के ऊपर हावी नहीं होने दे रहा था, उसे नई ताकत मिली (Who Moved My Cheese)।

उसे अब यकीन हो चुका था की उसकी मन पसंद वस्तु उसे जरुर मिलेगी। सवाल बस इतना था की इन सब में वक्त कितना लगेगा, वो मुस्कुराया और उसने दीवार पर लिखा:
“Cheese के बिना रहने के बजाए भुल-भुलैया में तलाश करना ज्यादा सुरक्षित है।”
यहां पर लेखक ने हमें एक संदेश दिया है की पुरानी विफलता पर रोने से बेहतर है कि नए काम में लग जाए और conditions को अपने पक्ष (favour) में किया जाए (Who Moved My Cheese)।
Haw ने दुबारा ये महसूस किया की आप किसी चीज से जितना डरते हैं, वो उतनी बुरी भी नहीं होती। असली तस्वीर उतनी बुरी नहीं होती जितनी बुरी तस्वीर हमारे दिमाग में बनी होती है। उसे नया cheese ना ढूंढ पाने का डर इतना ज्यादा था की वो इसे ढूंढने की शुरुआत ही नहीं करना चाहता था। बीच रास्ते में उसे इतना cheese मिले की उसका काम चल जाए, इससे वो और रोमांचित हुआ जा रहा था (Who Moved My Cheese)।
वो हमशा ये सोचता रहा की क्या बुरा हो सकता है बजाए कि उसके साथ क्या अच्छा हो सकता है।
Station C छोड़ने से लेकर अब तक वो काफ़ी positive हो गया था। अब वो ये समझ गया था कि changes तो आते ही है, चाहे आप इसके लिए तैयार हो या ना हो (Who Moved My Cheese)। आप तभी परेशान हो सकते हैं जब आप इसके लिए तैयार ना हो।
सीख
उसने ये महसूस किया की उसके विश्वास अब बदल चुके हैं, उसने दीवार पर लिखा:
“पुराने विश्वास आपको नए cheese की तरफ नहीं ले जाते।”
“जब आप देखते हैं की आप नया cheese ढूंढ सकते हैं तो, आप अपना रास्ता बदल लेते हैं।”
“पुरानी मान्यताएं आपको नए cheese की ओर नहीं ले जाती हैं।”
“जब आप देखते हैं कि आप नया cheese पा सकते हैं, तो आप course बदल लेते हैं।”
अब वो समझ चुका था की बदलाव तो आना तय है, चाहे आप उसे उम्मीद करते हैं या नहीं। परिवर्तन आपको तभी surprise करते हैं जब आप इसके लिए तैयार नहीं होते है (Who Moved My Cheese)।
अब जब उसे महसूस हुआ की उसके पुराने विश्वास अब बदल चुके हैं और ये नए विश्वास के साथ अब वो खुद भी बदल चुका था और पहले से ज्यादा confident हो चुका था (Who Moved My Cheese)।
Haw ने ये भी महसूस किया की अगर वो उसी वक्त बदलाव को समझ पाता और जल्दी station C छोड़ दिया होता तो आज वो बेहतर हाल में होता। उसमें ज्यादा ताकत होती और वो ज्यादा अच्छे से मुकाबला कर पाता। वास्तव में अगर उसने बदलाव की उम्मीद की होती तो अब तक शायद नया cheese मिल गया होता, पर उसने ये बात को मानने में बहुत वक्त गवां दिया था (Who Moved My Cheese)।
उसने अपनी will power को collect किया और भूल भुलैया के नए हिस्सा में पहुंचा। वहां cheese के छोटे टुकड़े मिले तो उसकी ताकत और confidence दोनों बढ़ने लगे। उसने कई जगह पे कहावत लिख दी इस उम्मीद में की कभी अगर Hem यहां आया तो ये सब पढ़कर inspire होगा, और ये कहावतें उसे आगे बढ़ने में मदद करेगा (Who Moved My Cheese)।
एक बात पर वो काफ़ी वक़्त से विचार कर रहा था और उसे वो विचार दीवार पे लिख दिया:
“छोटे changes का पहले से ही अंदाजा लगाने से आपको आने वाले बड़े changes के हिसाब से adapt करने में मदद मिलती है।”
Haw अभी तक अपने बीते हुए कल से बाहर आ गया था और अपने भविष्य की ओर बढ़ रहा था। उसे लगा था की अब तक वो फंसा हुआ था पर अब वो उससे बाहर आ चुका था, उसके अध्याय का एक सुखद अंत हुआ है।
Haw को एक और cheese station मिला station N।
जब उसने अंदर जाकर देखा, वो यकीन नहीं कर पा रहा था जो उसने अभी-अभी देखा, वहां हर तरफ उंचे ढेर लगे थे cheese के (Who Moved My Cheese)।
उसने ये भी देखा की वहां उसके दोस्त Sniff और Scurry भी वही थे और उनके मोटे पेट बता रहे थे की वो काफ़ी समय से वही थे (Who Moved My Cheese)।
Haw ने दोनों को नमस्कार किया और cheese को चखा। उसने अपने shoes और jogging suit उतार के अपने पास ही रख लिया की हो सकता है शायद फिर से कहीं उसे इसकी जरूरत पड़ जाए। उसने एक cheese का टुकड़ा उठाया और बोला “एक जाम change के नाम”।

वो खुद पे हंसा और उसने ये पाया की उसमें अब बदलाव आ गया है, जब उसने खुद पर हंसना सिखा और ये सोचा की वो कहां पर गलती कर रहा था। उसने ये महसूस किया कि सबसे तेज बदलने का रास्ता है, खुद की गलतियों पर हंसना, तभी आप बीते हुए कल को पीछे छोड़ सकते हैं और तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
उसने ये भी महसूस किया की Sniff और Scurry ने अपनी जिंदगी को आसान रखा। उन्होंने situation को complex नहीं बनाया, न ही उस पर बहुत ज्यादा सोचा। जब हालात बदले और cheese हटा लिया गया तो वो भी बदल गए और नए cheese की तलाश में लग गए (Who Moved My Cheese)।
अब Haw जान चुका था की आप changes का सामना करना सीख सकते है- आप को जागरूक रहने की जरूरत है की आप situation को simple रखे, flexible बने और आगे बढ़े।
ज्यादा सोचकर हालात को और बुरा बनाने से बचे, ना ही नकारात्मक विश्वासों को अपने ऊपर हावी होने दे (Who Moved My Cheese)।
बस ये देखते रहे की कब छोटे-छोटे बदलाव हो रहे हैं ताकी आप बड़े बदलाव के लिए तैयार हो सके और एक बात उसने सिखी की अगर आप समय रहते खुद को ना बदल सको तो हो सकता है की बाद में बदलने का कोई फायदा ही ना हो (Who Moved My Cheese)।
खुद को बदलने का सबसे बड़ा दुश्मन आपके अंदर ही बैठा हुआ है, जब तक आप खुद नहीं बदलते हैं, तब तक कुछ नहीं बदलता है (Who Moved My Cheese)।
सबसे महत्वपूर्ण बात जो उसने सिखी थी वो ये थी की बाहर हमेशा नया cheese मौजूद रहता है, चाहे आप इस बात को उस समय पहचाने या नहीं और ये आपको तब मिलता है जब आप डर से आजाद होकर रोमांच का मजा लेते है। कई डर अच्छे होते हैं और वो आपको खतरों से दूर रखते हैं पर कई डर बेवजह होते हैं, और ये ही डर आपको बदलने नहीं देते (Who Moved My Cheese)।
उसने सोचा की शायद Hem ने station C की दीवार पर लिखी कहावतों को पढ़ लिया होगा। उसने लौटकर Hem को सब कुछ बताने के बारे में सोचा की शायद वो आने को तैयार हो जाए पर वो जानता था की ऐसी एक कोशिश वो पहले भी कर चुका है और उस कोशिश का कोई फायदा नहीं हुआ। उसने सोचा Hem को अपना रास्ता खुद ढूंढना होगा, इसके लिए उसे खुद बदलना होगा, उसके लिए ये काम कोई और नहीं करेगा (Who Moved My Cheese)।
हमको भी ये बात समझने की जरूरत है की ये जिंदगी हमारी है, और हम ही इसके लिए जिम्मेदार है। हमें खुद की जिंदगी की जिम्मेदारी लेनी होगी, जब तक हम जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक कुछ नहीं बदलेगा (Who Moved My Cheese)।
“Changes होते हैं, और वो cheese को हटाते रहते हैं”
“Changes को पहले से ही महसूस करना सीखों, इस पर नज़र बनाए रखो”
“Cheese को बार-बार सूंघते रहो ताकी आप जान सको की यह कब बासी हो रहा है”
“जितनी जल्दी आप पुराने cheese से दूर हटते हैं उतनी ही जल्दी आप नए cheese का मजा ले सकते हैं।”
“खुद को बदले और cheese के साथ आगे बढ़े”
“Changes का मजा ले, रोमांच का मजा ले और नए cheese का मजा ले”
“जल्दी से बदलने के लिए तैयार रहे और फिर इसका मजा उठाए क्योंकि वो cheese को हटाते रहते हैं।”
Haw को अब ये एहसास हो चुका था की वो station C में जिस हालात में था, उससे बहुत दूर आ चुका है। पर वो भी जानता है की अगर वो ज्यादा comfortable हो गया तो फिर से पुरानी हालत में पहुंच जाएगा। इसीलिए अब वो रोज station N को check करता की कहीं उसका cheese कम तो नहीं हो रहा है। वो ये पक्का कर लेना चाहता था कि कहीं से कोई अचानक बदलाव आकर उसे surprise ना कर दे (Who Moved My Cheese)।
Haw के सामने cheese का ढेर था, लेकिन अभी भी वो भूल भुलैया में घूमकर नए cheese की तलाश करता रहता है ताकी वो अपने चारों तरफ हो रही चीजों की जानकारी रख सके। उसने आखिर में एक कहावत लिखी –
“Cheese के साथ बढ़ते जाएं और इसका मजा लेते रहे”।
यहाँ इस कहानी के कुछ मुख्य अंश दिए गए हैं :
हम इस दुनिया में अपने cheese को तलाश रहे हैं। जहां पर बदलाव आना तय है। बदलाव का अंदाजा लगाए, बदलाव से डरे नहीं । बदलावों की अनदेखी करके खुद को धोखा न दें, खुद को बदलाव के अनुसार adapt करें। परिवर्तन का मज़ा लें, नए अवसर की तलाश करते रहें, अच्छे के लिए खुद को बदले, विकसित मानसिकता रखें, जब तक आप नहीं बदलेंगे, तब तक कुछ नहीं बदलेगा।
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Contents












Thank you so much sir for adding this book in my library for broke old beliefs.
My key learning points ✍️
1. Always face charges in life in every field
2. Keep going next
3. Set your mind with positive attitude
4 learn from your mistakes
5 if one things goes than fous on next coming things in life ? be optimistic ✨✨✨✨
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Thank you
Thank you
Thank you ???? amit sir for this amazing book summary ????
Who Moved My Cheese – by Spencer Johnson
– Changing continuously could be painful but not more painful than regret
-We should reason and take action according to the situation. We should keep an eye on changes too.
– Growth mindset is the mindset we all must have .
Working according to a fixed mindset is harmful .
-the ultimate fear of us all human beings, to be called a fool. We are afraid to be called a fool.
-Understand that what is gone is gone. We need to move on . We should move further; this is how life goes; keep pushing further.
-In life, our fear doesn’t let us move forward, and at this stage, we must question ourselves, what would I do if I was not afraid?
-We humans should accept changes going around because changes are inevitable. All we can do is keep an eye on them and do something so that we don’t get into trouble.
-We should be positive in every negative situation.
– Use of the power of imagination
-Crying over failure will not do any good for you; go out there and hustle and try to make everything work in your favor .
-What you are afraid of is never as bad as you imagine. The actual image is better than it is in our minds.
-Changes are inevitable, whether you expect them or not. You will only get shocked when you are not ready.
Say , “hooray for change.”
– The fastest way to change is to laugh at your own mistakes; only then can you leave the past behind and move forward swiftly .
-Be flexible and keep moving forward.
Refrain from making things complicated & worse by overthinking. Don’t let negative self-beliefs let you down .
-You change yourself before it’s too late.
Change yourself before it’s too late.
Keep moving for better.
Change is inevitable so accept it and be ready for Change.
Laughing on our mistakes helps us to move from past ,learning from it is also necessary.
Imagination and be optimistic about good outcome.
Amazing story ???