एटॉमिक हैबिट्स क्या हैं? क्या आपने एटॉमिक हैबिट्स बुक पढ़ी है? क्या आप एटॉमिक हैबिट्स का पालन करते हैं? यहां, हम “जेम्स क्लियर” द्वारा लिखित पुस्तक “एटॉमिक हैबिट्स” को समझेंगे और अच्छी आदतों के निर्माण के बारे में सीखेंगे। एक अच्छी आदत बनाने में कभी कभी हम पूरी जिंदगी लगा देते हैं। और फिर एक दिन, छोटी सी गलती से वह आदत एक सेकण्ड में बदल जाती है ।
ऐसा क्यों होता है? दरअसल हम अक्सर ये मान के चलते हैं कि बड़ी सफलता के लिये बड़ी बड़ी कोशिशें भी ज़रूरी है। हालाँकि, ये साफ तौर पर ग़लत तो नहीं है, लेकिन कभी कभी छोटी कोशिशें भी ज़्यादा मेहनत से बेहतर परिणाम लाती हैं। जेम्स क्लियर की ये किताब “Atomic Habits” हमें उन्हीं आदतों के बारे में बताती है।
एटॉमिक (Atomic) के दो मतलब हैं, बहुत छोटा या असीमित ऊर्जा का स्त्रोत (immense energy source)। और आदत (habit) का मतलब है, वह चीजें जो हम रोज़ दोहराते हैं। साफ तौर से Atomic Habits वह छोटी छोटी आदतें हैं जो आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
James Clear की ये किताब “Atomic Habits” आदतों के बारे में सिखाने वाली एक ऐसी किताब है जिसमे सिखाये गए तरीकों को अपना कर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी (day to day life) में छोटे छोटे बदलाव करके अच्छी आदतें बना पाएंगे।
इस किताब को बेहतर तरीके से समझने के लिए हम इसे कई हिस्से में चर्चा करने जा रहे हैं ।
“Atomic Habits” किताब किन लोगों के लिए हैं?
- वे लोग जो कामयाबी के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं।
- वे लोग जो अपनी आदतों के बारे में जानना चाहते हैं।
- वे लोग जो मनोविज्ञान (psychology) पढ़ना चाहते हैं।
- वे लोग जो अपनी बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतें अपनाना चाहते हैं।
“Atomic Habits” किताब को पढ़कर आप क्या सीखेंगे ?
- हमारे छोटे छोटे काम क्यों नहीं होते है।
- हमारी आदतें किस तरह से बनते हैं।
- किसी भी उबाऊ काम को कैसे और किस तरह से मजेदार बनाया जा सकता है ।
बड़ी कामयाबी हासिल करने के लिए छोटे कदमों से शुरुआत करें।
छोटे छोटे कामों का नतीजा बहुत बड़ा हो सकता है।
जब आप हर दिन कसरत करते हैं, तो आप एक दिन में ही सेहतमंद और फिट नहीं बनते, लेकिन एक दिन आप जरूर सेहतमंद हो जाते हैं। वैसे ही जब आप हर रोज बाहर का फास्ट फूड खाते हैं, तो आपको पता नहीं लगता की आप मोटे हो रहे है। लेकिन कुछ कुछ दिनों या कुछ महीनो के बाद जब आप अपनी पुरानी फोटो देखते हैं, तो आपको पता लगता हैं कि हर रोज के उस फास्ट फूड खाने से आपकी सेहत पर क्या असर हुआ हैं।
हम हर रोज न जाने कितने ऐसे काम करते हैं, जो या तो अच्छे होते है या बुरे। हमें हमेशा ऐसा लगता हैं कि उस छोटे से काम का नतीजा कुछ खास नहीं होगा, लेकिन हम यह भूल जाते है कि उस छोटे से काम को लगातार करते रहने से हम न जाने कितने पीछे या आगे चले जा सकते हैं ।
उदाहरण के लिए एक व्यक्ति इंटरनेट पर हमेशा अच्छी अच्छी जानकारी को सर्च करता है और वही पर दूसरा व्यक्ति हर दिन इंटरनेट पर हमेशा मनोरंजन की चीजों को देखता है या सर्च करता रहता है। हालांकि देखने में लग रहा है कि दोनों ही व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन 5 साल बाद उन दोनों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा होगा ।
इसलिए अगर आप लंबे समय तक कामयाब और सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो आपको उन कामों को पहचानना होगा जो आपको आगे लेकर जा रहा है या पीछे, और उसके साथ यह भी देखना होगा कि वो काम करना अच्छा है या बुरा। और इसके बाद फैसला करना है कि वो काम आपको हर रोज करना चाहिए या नहीं?
आइये इसे एक उदाहरण के साथ समझते हैं : दोस्तों अगर आप आज कोई नया काम कर रहे हैं या कोई ऐसा काम जो आप हर रोज करते हैं तो आप खुद से सवाल कीजिए कि अगर आप इस काम को अगले 5 साल तक लगातार इसी तरह करते रहेंगे तो आपके ऊपर इसका क्या असर होगा? इस तरह से आप यह पता कर सकते है कि वो काम आपको करना चाहिए या नहीं?
अगर आप अपनी आय (income) का ज्यादातर हिस्सा अच्छे अच्छे उपकरण या सुख सुविधा खरीदने में खर्ज करते है, तो जाहिर सी बात है कि आप खुद को आराम दे रहे हैं। और 5 साल बाद इसका असर यह होगा की आप 5 साल बाद भी उतना ही पैसा कमा रहे होंगे जितना अभी कमा रहे है ।
लेकिन अगर आप अपनी आय का ज्यादातर हिस्सा खुद को पहले से बेहतर बनाने में या कहीं पर निवेश (invest) करते हैं जहा से आपको अच्छा खासा रिटर्न (return) मिले, तो जाहिर सी बात है किआप 5 साल बाद बहुत काम करके पैसा कमा रहे होंगे और एक सफल और कामयाब इंसान बनेंगे ।
इसे पूरी तरह समझने के लिए इसे जानें: एक बच्चा बड़ा होकर एक बड़ा क्रिकेटर बनेगा या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है, कि वो बचपन से इस दिशा में सीखता और अभ्यास (practice) करता है या नहीं। जो शुरू नहीं करेगा वो आगे बढ़ेगा कैसे? इसी तरह आपके परिणाम भी आपकी आदतों पर निर्भर करते हैं।
आपका बैंक में जमा राशि (bank balance) आपकी बचत (savings) पर और आपका वजन आपके खाने की आदतों पर। आपके पास कितनी जानकारी है ये निर्भर करता है कि आप कितना समय अपनी पढ़ाई को देते हैं। आपका कमरे और जीवन में उतना ही कूड़ा होगा जितने समय से आपने सफाई नही की। यानी आपको वही मिलता है जो आप रोज़ करते और दोहराते हैं ।
समय हार और जीत की दूरी को बड़ा करता है। जितना समय आप एक तरफ लगाएगें, उतना ही आप उसके करीब होंगे। अच्छी आदतें समय को आपका दोस्त और बुरी आदतें उसे आपका दुश्मन बना देती हैं। तो इस तरह आदतें हमारी जिंदगी की दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, या यु कहें की ये किसी की कामयाब जिंदगी में पुल के पिलर हैं, तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।
तो इस तरह आप समझ गए कि अच्छी आदतें कितनी ज़रूरी हैं, लेकिन इन्हें अपनाना कैसे है, ये जानने के लिए, यह समझना जरूरी है कि आदतें (habits) दो धारी तलवार की तरह हैं। अगर अच्छी हुईं, तो जीवन सफल हो जाता है, और अगर बुरी हुईं तो जीवन बर्बाद ।
आपने अक्सर ये सवाल सुना होगा, की आप आने वाले 5 साल में खुद को कहा देखते हो? या फिर आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हो? लेकिन ऐसा बहुत कम ही लोग पूछते हैं कि आने वाले 10 मिनट में तुम ऐसा क्या करोगे जो तुम्हारे जीवन को बेहतर बनाएगा? और ऐसी सोच रखने वाले लोग ही जिंदगी में ज्यादा कामयाब होते हैं।
इसे याद रखें कि,अगर आप ये मान के चल रहे हैं कि मैं कल से ही रोज़ 6 घंटे पढ़कर आने वाले 2 साल में कोई परीक्षा उत्र्तीण (exam crack) कर लूं, तो आप काफी दूर की सोच रखते है। ये गलत नहीं है, लेकिन इस तरह की लगातार करना लगभग नामुमकिन है ।
इसलिए सिर्फ एक परीक्षा उत्र्तीण (exam crack) करने को अपना लक्ष्य मत समझिये, बल्कि अपनी परीक्षा के पाठ्यक्रम (syllabus) को रोजाना छोटे छोटे हिस्से में बांट लें और हर रोज़ के बनाए हुए छोटे छोटे लक्ष्य को हासिल (achieve) करें। ऐसा हर रोज़ करने से आपकी लक्ष्य को हासिल करने की आदत बन जाएगी, जो बड़े लक्ष्य को हासिल करना आपके लिए आसान बना देगी।
और इस तरह से हर रोज़ 1 प्रतिशत बेहतर होना आपको 100 दिनों में 100 प्रतिशत बेहतर बना देगा और 1 साल में 3600 प्रतिशत और अंत में इतने ज्यादा बेहतर बनकर आप हर उस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं, जो शायद अभी बड़ा लग रहा हो ।
हर रोज़ अपने आप को 1% बेहतर बनायें।
आपकी पहचान आपकी आदतों से बनती है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आदतें बदलना इतना मुश्किल क्यों लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम या तो गलत चीजें बदलने की कोशिश करते हैं, या गलत तरह से अपनी आदत बदलने का प्रयास करते हैं ।
जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर बदलाव लाने के तीन मुख्य कारण होते है ।
- परिणाम (Outcome) पर आधारित बदलाव, अपनी मनचाही किसी चीज़ को पानें के लिए आदतों को बदलना
- प्रक्रिया (Process) पर आधारित बदलाव, मतलब जो भी काम आप कर रहे है, उसमें मज़ा आ रहा है, इसलिए उसे और ज्यादा मजेदार करने के लिए आदतों को बदलना
- पहचान (Identity) पर आधारित बदलाव, अपनी आदतों को बदल कर अपने आदर्श (ideal) इंसान की तरह बनना
अब आप खुद सोचिए इनमें से किस पर ध्यान देना चाहिए?
यदि आप सिर्फ परिणाम (outcome) के बारे में सोचेंगे तो बोर हो जाएंगे, क्योंकि हमारे वांछनीय परिणाम (desirable outcome) हो सकता है कि इतने बड़े हो जिन्हे महीनों या सालों की लगातार कोशिशों के बाद ही हासिल किया जा सके। इसलिए कोशिश करे कि बदलाव को अपनी पहचान का हिस्सा बनायें और प्रक्रिया (process) का मज़ा लें। मतलब है कि हर दिन अपने आप में कुछ प्रतिशत बेहतर बदलाव करने के लिए अपनी आदतों को बदलें।
उदाहरण के तौर पर अगर आप रोज अखबार पढ़ने की आदत लगाना चाहते हैं, तो लघु समाचार (short headlines) पड़ना शुरू करें। फिर उन्हें अपने जानने वालों के साथ साझा (share) करें। इससे लोग आपको सब समाचार के जानकार के रूप में पहचानने लगेंगे। और रोज अखबार पढ़ना आपकी आदत बन जाएगी ।
अच्छी आदत बनाने के चार आसान तरीके।
ये सच है कि सवाल ही जवाब है, और जो जितना अच्छा सवाल पूछता है उसे उतना अच्छा जवाब मिलते हैं, जो जवाब जिंदगी को एक नए और बेहतर मुकाम पर ले जाते हैं। ये बात आदतों के बारे में भी सच है, इसलिए जब भी आप अपनी कोई आदत बदलना चाहते हैं, तो खुद से ये चार सवाल जरूर पूछें।
- मैं इसे कैसे बदल सकता हूं? कौन से छोटे छोटे कदम इसे बदलने के लिए में अभी से ले सकता हूँ?
- मैं इसे कैसे आकर्षक बना सकता हूं? ताकि बदली हुई आदत को करते हुए मुझे मज़ा आये?
- मैं इसे कैसे आसान बना सकता हूं? ताकि में बेहतर आदत को आसानी से अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकूँ?
- मैं इसे कैसे संतुष्ट (satisfying) बना सकता हूं? जिसे करने के बाद मुझे मज़ा आये?
इस तरह से आदतों का मुख्य उद्देश्य (purpose) ही आपके जीवन को आसान और बेहतर बनाना है। इसलिए उन्हें बदलें।
जो आप बनना चाहते हैं, खुद को वैसा बनते हुए कल्पना (imagine) करें।
आप जब भी कोई नई आदत अपनाने की सोचते है, उससे पहले ये सोचें कि उसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव होगा। क्या इस आदत से मैं वो बन पाऊंगा जो मैं बनना चाहता हूँ?
अगर आपको हां में जवाब मिले तो समझ लीजिए कि आपका दिमाग एक नई आदत को अपनाने के लिए तैयार है। इसलिए फिर अपने आप को उस तरह से काम करते हुए कल्पना (imagine) करें, कि बेहतर आदत अपनाने के बाद आप कैसे काम करने वाले हैं, कैसे सोचने वाले हैं और किस तरह से महसूस करने वाले हैं।
नई आदत शुरू करने का सबसे बेहतर तरीका।
जिन लोगों को लगता है, कि उनमें कुछ करने के लिए प्रेरणा (motivation) की कमी है, उन्हें इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि असल मे उनमें कमीं प्रेरणा (motivation) की नहीं बल्कि स्पष्टता (clarity) की कमी है। वो ये जानते ही नही की उन्हें कहाँ जाना है, या फिर क्यों जाना है। इस बारे में बिल गेट्स कहते हैं कि हर वो इंसान असीम कामयाबी हासिल कर सकता है जिसके पास स्पष्टता (Clarity) और ऊर्जा होती है।
ऐसे में एक नई आदत बनाने का एक सबसे अच्छा तरीका है कि आप एक इस बात की स्पष्टता (clarity) बनाएं कि
- आप आदत को क्यों बदलना चाहते हैं ?
- इस आदत को छोड़ने के लिए क्या छोड़ने वाले हैं ?
- नयी आदत अपनाने के लिए कौन से छोटे छोटे कामों से शुरुआत करने वाले हैं ?
- अभी से छोटे गतिविधि (action) से शुरुआत करें।
आपको ज़्यादा प्रेरणा (motivation) की नहीं अच्छे वातावरण (environment) की ज़रूरत है।
James Clear का एक प्रशिद्ध quote है, “Environment is the invisible hand that shapes human behavior.”
आसान शब्दों में कहें तो आपके आस पास की वो चीज़ें जिनके साथ आप ज्यादा समय बिताते हैं। ये चीज़ें कोई किताब, किसी बात को सोचना, आदि हो सकते हैं।
और याद रखें कि हर आदत की शुरुआत जरूरत से होती है, इसलिए बेहतर आदत को अपनाने के लिए एक बेहतर जरूरत को ढूंढे और उस तरह के नजरिया (mindset) वाले लोगों, विचारों के साथ ज्यादा समय बिताएं और उस बारे में महसूस करें।
आत्म संतुलन (Self control) कैसे करें।
एक बार अगर अच्छी आदत पड़ जाए तो वो हमेशा बनी रहती है और जिंदगी को बेहतर बनाने में साथ देती रहती है। लेकिन फिर भी कभी कभी इंसान का दिमाग ख़राब आदतों के संतुष्टि (setisfaction) के लालच में उनमे भटक जाता है।
उदाहरण के तौर पर जब भी आप वजन कम करने के लिए डाइट (dite) के दौरान कुछ मीठा देखते हैं तो, उसे खाने के लिए लालच बढ़ने लगता है और आपका आत्म संतुलन ( self control) खोने लगता है। और ऐसे में कुछ लोग तो हार कर अपनी डाइट भी त्याग देते हैं। जिस वजह से दोबारा ख़राब आदतों या यु कहें की ख़राब जीवन शैली (lifestyle) में पहुंच जाते हैं।
इसी लिए आत्म संतुलन ( self control) करना बहुत जरूरी है। और इसे बनाने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि आप ऐसी चीज़ो को अपनी नज़रों से दूर रखें जो आपका मनोबल तोड़ सकती है, और आपके मनोबल को बढाने वाली चीज़ों जैसे विचार,भाव और लोगों को अपने आस पास रखने या खुद उनके बीच जाएँ।
आदतों की आदत कैसे डालें।
आदतों की आदत डालने का मतलब है कि अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहतर आदतों को अपनाने और ख़राब आदतों को छोड़ने की आदत बनाना ।
इसके लिए हमेशा अपनी नज़र लक्ष्य पर रखें। ये सोचें कि अगर आज मैं इस आदत को पूरी तरह अपना लूं तो कल मुझे इसका क्या फायदा होगा। इससे मेरा कल कितना ज्यादा बेहतर और आरामदायक होने वाला है।
और लगातार ऐसा करने से अपनी आदतों को आकर्षक बनाने और परिणाम पर नज़रें गड़ाए रखने की आदत लग जाती है। जो एक शांत, खुश और कामयाब जिंदगी बनाने में बहुत मदद करती हैं।
परिवार और दोस्तों का आपकी आदतों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि, हम हमेशा अपने आस पास के लोगों के जैसा बनने के कोशिश करते हैं। और कामयाब लोगों का ये मशहूर Quote है कि, “आप उन पांच लोगों के औसत होते हैं, जिनके साथ ज्यादा समय बिताते हैं”, आपकी आय, स्वास्थ, सम्मान और सोचने का तरीका लगभग उन पांच लोगों का average होता हैं।
इसीलिए ये ज़रूरी है, कि आपके परिवार और दोस्तों की आदतें अच्छी हो। और अगर ऐसा नहीं है, तो आप किसी ऐसे समूह या सभा (club) में शामिल हो जहां उस तरह की मानसिकता के लोगों का उठना बैठना होता है, जैसे आप बनना चाहते हैं।
बुरी आदतों की वजह कैसे ढूंढे और उसे कैसे बदलें।
जैसे किसी अच्छी आदत के परिणाम के बारे में सोचना उसे आकर्षक बनाता है, परिणाम को सोचकर आप उस आदत या काम को और जोर शोर और प्रेरणा (motivation) से करने लगते हैं, वैसे ही किसी बुरी आदत के नतीजे के बारे में सोचना उसे बेकार बनाते है और आपको निराश करता हैं।
इसलिए आप रोजाना ही इस पर ध्यान दें और ऐसी आदतों या गतिविधिओ (activity) को ढूंढ निकालें जो आपका समय बर्बाद करती हैं, आपकी उत्पादकता (productivity) को कम करती हैं, या लक्ष्य की तरफ ले जाने में कोई भूमिका नहीं निभाती । फिर उन आदतों के परिणाम पर विचार करें और मनचाहे परिणाम देने वाली आदतों को लगातार करते रहें और बाकी को छोड़ दें ।
धीरे धीरे आगे बढ़ें।
अपनी आदतों में बदलाव करने के लिए ये भी ज़रूरी है कि आपकी नई आदतें आसान हों। उन्हें शुरू करना और दोहराना आसान हो। कोई भी आदत उसे बार बार दोहराने और धीरे धीरे आगे बढ़ने से बनती है। इसलिए किसी भी नए काम या आदत को छोटे छोटे स्टेप्स (steps) में करे और धीरे धीरे इसे बढ़ाये। लेकिन ये ध्यान रखें कि निरंतरता (consistency) को बनाए रखें ।
कम मेहनत और ज़्यादा से ज़्यादा परिणाम।
ये सुनने में कितना अच्छा लगता है ना? वास्तव में ये सच भी है, क्योंकि सच में हमारा दिमाग भी ऐसे ही काम करता है। इसे भी किसी काम को करने के लिए शुरुआत में कम मेहनत वाला रास्ता चुनना पसन्द आता है। ऐसा काम जो कम मेहनत और कम समय में हो जाये। इसलिए अपने दिमाग से बेहतर काम करवाने के लिये बेहतर नतीजे हासिल करने के लिए, उसे खुश रखें और उसकी सुने। मतलब वो काम करें जो आप शांत दिमाग से कर सकें। ध्यान रखें की शुरुआत में किसी काम को करने के लिए दिमाग पर दबाव न डालें, बस शांत दिमाग से उसे रोज़ थोड़ा थोड़ा करें, और जब ये काम कुछ दिनों तक लगातार होगा तो दिमाग उस आदत को बेहतरीन तरीके से करने का रास्ते अपने आप ढूंढ लेगा, आपको जरूरत होगी तो बस इतना करने की बेहतरीन आदत या काम को रोज़ और लगातार करें।
2 मिनट में टालमटोल को रोकें।
टालमटोल (Procrastination) अच्छी आदतों और बेहतर जिंदगी या आसान शब्दों में कहें तो सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन है। और इसे बदलने का एक अच्छा तरीका है – 2 मिनट मतलब इसके अनुसार जब भी आप कुछ करने की सोचें तो उसे ऐसा सोचने के दो मिनट के अंदर ही करना शुरू कर दे। ताकि आपके दिमाग को भटकने का अवसर ही न मिले और और आप बेहतर काम कर दें।
अच्छी आदतों को जीवन का हिस्सा बनाये और बुरी आदतों से छुटकारा पाएं।
“inversion law” जैसे कि अच्छी आदतों को अपनाने के लिए उन्हें आसान बनाना जरूरी है, वैसे ही बुरी आदतों से छुटकारा आने के लिए उन्हें मुश्किल बनाना।
उदाहरण के तौर पर, जब हमें सोशल मीडिया साइट (social media site) के इस्तेमाल की आदत से छुटकारा पाना होता है तो हम उन apps को ही मिटा (delete) देते है। इससे हम उस आदत को संभव बना देते है।
व्यवहार में बदलाव करने का जरूरी नियम।
ये सच है कि जब भी कुछ कम करने से हमें संतुष्टि (satisfaction) मिलती है तो हम उस चीज को दोबारा करने से नहीं कतराते, बल्कि ज्यादा से ज्यादा बार और ज्यादा समय करने की कोशिश करते हैं। इसीलिए व्यवहार में सकारात्मक बदलाव करने के लिए नई आदतों को संतोषजनक (satisfactory) बनाये, इसके लिए शुरुआत ऐसे कामों से करें जिससे संतुष्टि (satisfaction) मिलती है और इसी तरह काम और संतुष्टि (satisfaction) को बढ़ाते रहें ।
ये ख़राब आदतों को अच्छी आदतों में बदलने का जरूरी नियम है। हमेशा वो कार्य करे जिससे आपके मन को शांति और ख़ुशी मिले।
हर रोज़ अच्छी आदतों से कैसे जुड़े रहें।
मनोवैज्ञानिक खोज (Psychological Research) के मुताबिक, हमें सबसे ज्यादा संतुष्टि (satisfaction) तब मिलती है जब हम अपना कोई लक्ष्य पूरा कर लेते हैं। आपने अपना लक्ष्य पूरा किया या नहीं इसे जानने के लिए एक “habit tracker app” डाउनलोड करें। या फिर किताब या कैलेंडर पर निशान बना कर अपनी आदतों को पता करें। इससे आपकी आदतों और आपके बीच एक जुड़ाव बनेगा। और इस तरह अपनी आदतों से जुड़े रहने के लिए उन्हें देखे औरसुनिश्चित करें की सुधार क्षेत्र (improvement zone) में हर रोज़ के अपने लक्ष्य को पूरा करें।
कैसे किसी को जवाबदेही भागीदार (Accountability Partner) बनाना सब बदल देता है
अपने परिवार या दोस्तों में ऐसे लोगों को देखे, जो आपको कामयाब देखना चाहते है, उनके साथ अपने लक्ष्य और दिनचर्या (daily schedule) पर विचार करें। ऐसा करने से एक जवाबदेही स्थापित होती है, क्योंकि जब आप सही काम करेंगे, अच्छी आदत को करेंगे, लक्ष्य के लिए काम करेंगे तो वो आपकी सराहना करेंगे और उसी तरह भटकाव में वो अच्छा मार्गदर्शन करेंगे, जो आपको सही मार्ग पर चलते अच्छी आदत से जुड़े रहने में मदद करेंगे।
प्रतिभा के बारे में सच्चाई
आपको कामयाब होने के लिए सही लक्ष्य चुनना बहुत ज़रूरी है। और लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी रूचि और प्रतिभा को पहचाना और सुधारना बहुत जरूरी है। उदाहरण के लिए अगर आपको गाने में रुचि नहीं और आप दुनिया के सबसे प्रसिद्ध गायक बनने को अपना लक्ष्य बना लें, तो ये सरासर बेवकूफी है। लेकिन अगर आपको लिखने (writing) में रूचि है और आप दुनिया का महान लेखक बनने का लक्ष्य बनाए और उसके लिए जरूरी चीज़ें सीखते हुए अपनी प्रतिभा को बढ़ाएं तो एक दिन आप जरूर दुनिया के महान लेखक बन सकते हैं। ।
इसे आसान शब्दों में कहें तो आदतें अपनाना तब आसान होता, जब वे आपकी प्राकृतिक क्षमताएं (natural abilities) के साथ मेल खाएं, प्राकृतिक क्षमताएं (Natural abilities) का मतलब वो काम जिसे करने में आपको मज़ा आये, वो काम आपको खेल लगे काम नहीं । इसीलिए उन्ही आदतों को चुनें जिन्हें करने में आपकी रूचि है और जिनसे आपको खुशी मिलती है और फिर उसमे बेहतर बनने के लिए अपनी काबिलियत को बढ़ाते रहें ।
“Goldilocks” का नियम, जीवन में प्रेरणा (Motivation) कहां से लाएं।
सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन असफलता (failure) नहीं बल्कि बोर होना है। इसलिए जब हम कुछ करने से बोर हो जाते हैं, तो उसे करने में प्रयास नहीं करते इसलिए कई बार उसे करना लगभग नामुमकिन सा लगने लगता है, और धीरे धीरे ये ख़राब आदत लोगों को असफलता की तरफ ले जाती है। “Goldilocks” के नियम के मुताबिक, “इंसान उन कामों को काम करते समय अधिक प्रेरणादायक (Motivate) अनुभव करता है जो उसकी वर्तमान क्षमताओं (current abilities) से मेल खाती हैं।
इसीलिए किसी कामयाब इंसान से प्रभावित होकर सीधे उनकी किसी आदत या दिनचर्या को जबदरसती न अपनाये, बल्कि अपनी काबिलियत को देखें की आप किस आदत को करने में ज्यादा ख़ुशी महसूस करते है, और उसको अपनी आदत बनाए। इसके जरिये लक्ष्य तक पहुंचना तेज़ और आसान होगा। या ये कहें की ये आपका फ़ास्ट ट्रैक है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
अच्छी आदत कैसे बनती है ?
आदत बनती कैसे है –संकेत (Cue), लालसा (Craving), प्रतिक्रिया (Response) और इनाम (Reward) का अभ्यास (practice) करने से। कोई भी आदत फिर चाहे वो अच्छी हो या बुरी 4 चरणों (stages) में बनती है।
1: संकेत (cue) – सबसे पहले आपको बाहर से एक इशारा मिलता है। जैसे अगर आप कहीं स्मोकिंग (smoking) का चित्र देखते हैं तो वो आपके लिए संकेत का काम करता है।
2: लालसा (Craving) – संकेत या cue मिलने के बाद आप में भी उस चीज की लालसा या craving जाग उठती है।
3: प्रतिक्रिया (Response) – फिर आप उस लालसा या इच्छा को प्रतिक्रिया देते हो। यानी आप उस काम को करने लगते हो।
जैसे smoking का चित्र देखकर आप में इच्छा आ सकती है। और फिर आप सिगरेट पीने लग सकते है।
4: इनाम (Reward) – पर्तिकिर्या (Response) देने के बाद आपका दिमाग आपको ख़ुशी और आनंद का इनाम या रिवॉर्ड देता है।
आपने देखा होगा सारी बुरी आदतें आपको थोड़े समय के लिए आनंद से भर देती हैं। लेकिन धीरे – धीरे यही आनंद आपके दुखों का कारण बन जाता है। आपको तरह -तरह की परेशानियां होने लगती हैं।
लेखक कहते हैं कि अगर आपको कोई बुरी आदत छोड़नी है तो चरण (Stage) 1 में ही संभल जाएँ।
जैसे आपके सामने smoking का पोस्टर हो तो उसकी ओर न देखें। बल्कि दौड़ते हुए वहाँ से निकल जाएँ। अगर भनक (clue) लग भी जाये तो इच्छा को खत्म कर दें। इच्छा होने भी लगे तो प्रतिकिया (response) न दें बल्कि दूसरा काम करने में लग जाएँ। इससे आप कभी भी उस आदत में नहीं फंसेंगे। और अच्छी आदतें बनाने की तरफ चल सकेंगे।
अच्छी आदतें बनाने का फार्मूला
अच्छी आदत बनाने का सूत्र -स्पष्ट (Obvious), आकर्षक (Attractive), आसान (Easy) और संतुष्ट (Satisfying)! आइये अब देखते हैं आप कोई भी अच्छी आदत कैसे बना सकते हैं। इसके लिए आपको 4 तरीके अपनाने हैं।
1: स्पष्ट (Obvious) – इसका सरल अर्थ है – जो भी अच्छी आदत बनाना चाहते हैं तो पहले उसका लक्ष्य बना ले मतलब आप पाना क्या चाहते हैं और कितना? जैसे “blogging” का उदाहरण ले लेते हैं। अगर आपको “blogging” करनी है तो यह निर्णय कर लें कि कितना पैसा कमाना चाहते हैं। शुरुआत हैं तो आपका लक्ष्य 5000/महीना हो सकता है।
अगर आप दिमाग को यह लक्ष्य देंगे तो उसे कोई उलझन नहीं होगी। वह उस लक्ष्य को हासिल करने में लग जायेगा। लेकिन आप ऐसा सोचेंगे कि ब्लॉग से बहुत सा पैसा कमाऊँगा तो दिमाग उलझन में रहेगा। क्योंकि बहुत का मतलब तो कुछ भी हो सकता है।
आप दिमाग को स्पष्ट लक्ष्य दें। ऐसे ही “Blog” के मामले में, आप दिन में कितना लिख सकते हो इसका भी लक्ष्य बना लें। एक पेज लिख सकते हो तो बोलें कि एक पेज रोजाना लिखूंगा। ऐसा न हो की आज तो 5 पेज लिख लिए फिर एक हफ्ता तक कुछ भी न लिखें।
ऐसे ही “व्यायाम” (bodybuilding) करनी है तो ये स्पष्ट कर लें कि कितने घंटे व्यायाम करेंगे। 15 मिनट, 30 मिनट आदि। जितना समय हो उतना करें। ऐसे ही कितने push-ups मारने हैं ये पहले ही सोच लें – 20, 40, 80।
तो हर काम का लक्ष्य ऐसा रखें कि दिमाग स्पष्ट हो पाए। तभी वो उसे आपसे हासिल करवाने की कोशिश करेगा।
2: आकर्षक (Attractive) – लक्ष्य को आकर्षक यानि मजेदार बनाएँ। आप कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएँगे अगर आपको वो बोझ लगता है। इसलिए उसे आकर्षक बनाना बहुत जरूरी है। इसके बहुत से तरीके हो सकते है। जैसे काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लेना।
जैसे “blogging” में पोस्ट लिख रहे हैं तो 500 शब्द लिखिए फिर थोड़ी देर रुक जाये! और उस दौरान पार्क में टहल कर आ सकते है। संगीत भी सुन सकते हैं। जब फिर से ताजगी महसूस (fresh feel) करें तो 500 शब्द और लिखें। ऐसे ही बॉडीबिल्डिंग में एक rep के बाद आराम कर लें। दोस्तों के साथ गपशप मार लें। ऐसे ही किसी भी काम को लम्बे समय तक एक साथ न करें। हर आधे घंटे में रुक रुक कर कर सकते है! और उस दौरान कुछ दिलचस्प काम कर लें।
3: आसान (Easy) – लक्ष्य को हासिल करना आसान बना लें। इसके लिए पहले तो असंभव लक्ष्य न रखें। पहले ही दिन “bodybuilding” में 100 push – ups करने की न सोचें। “Blogging” में एक ही दिन 4 -5 पोस्ट लिखने की न सोचें। लक्ष्य को छोटे-छोटे तरीकों को अपना कर पूरा करें। आपको बहुत आसान लगेगा।
4: संतुष्टि (Satisfying) – लक्ष्य से आपको संतुष्टि (satisfaction) मिलनी चाहिए। जैसे “bodybuilding” कर रहे हों तो देखें कि आप शक्तिशाली (muscular) और सुन्दर (handsome) होते जा रहे हैं। चर्बी (Fat) कम कर रहे हैं। बुरी आदतों पर काबू पा रहे हो। जब आपको संतुष्टि (satisfaction) मिलेगी तो आप उस अच्छी आदत को जारी रखने की प्रेरणा (motivation) मिलेगी।
लम्बे समय तक आदत को कैसे जारी रखें
अगर आप किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए अच्छी आदत बनाना चाहते हो तो दो काम जरूर करें। पहले उसे करने का समय सुनिश्चित कर लें। और दूसरा उस काम को कहाँ पर करेंगे ये भी निर्णय कर लें। जैसे “blogging” के लिए पोस्ट लिखनी है तो किस समय लिखेंगे। सुबह 1 घंटे लिखेंगे या शाम को। या दोनों वक़्त लिख सकते हैं। ये सब तय कर लें। इस से आपका दिमाग सक्रिय (active) हो जायेगा। फिर ये भी सोच लें कि किस कमरे में कहाँ पर बैठ कर लिखेंगे। तो समय और जगह सुनिश्चित करना बहुत जरुरी होता है।
निष्कर्ष
तो ये हैं आदतों के बारे में जानकारी और बेहतर आदतें बनाने के तरीके। हमें उम्मीद है कि, आपने कई जरूरी बातें सीखी होंगी। अब इन्हे अपनी जिंदगी में अपनाएं और ख़राब आदतों, वैसी आदतें जो जिंदगी की वास्तविक ख़ुशी में कोई खास मायने नहीं रखती, बस कुछ पल की संतुष्टि देतीं हैं, बेहतर और अच्छी आदतों से बदल दे ऐसी आदतों से जो आपको सच में ख़ुशी, शान्ति और कामयाबी दें और उसी दिशा में शिखर (top) तक ले जाएँ।
सभी Podcast platform पर भी हमारी summary, Kitabein नाम से उपलब्ध है, जिसे हाल ही में भारत का best educational podcast का award भी मिला है। Link ठीक निचे दिया हुआ है:
Contents












Really appreciated book .. but i realised that book we will read on 1 December through which we plan set the time of book reading etc.
Is book se maine sikha ki , ham demotivate isliy hi hote hai kuki hamme clearty nahi hoti hai , koi bhi kaam ki suruat hamesha chote chote tarike se karna aur unhe attractive banana hame us kaam ko krne k liy daily protshahit karta hai jisse ham saflta ke kareeb pahochte hai
Ek achha Adat apnane k liye chhote chhote step se suru kare
Apne buri adat se Kya Kay nuksan hotahe pate kare Aur use chhodde
Kisi v adat pahale snket dekte he uske bad us adat k liye man me lalaj jagtahe auk bad hum us adat par pratikriya karte he hame pahale us Adat KO dekhte hi use dur 6ale janahe agar man k lalaj aa v jae to use nahi karke koi aur kam Karna he
Hame procrastination KO chhodne k liye
Jo v socche use 2 minutes k andar karlena jaruri k kaki hame kuch procrastination karne k liye soch nahi PAYE
Unsuccessful hone ka karan failure nahi he Uska Karna bore ho na he
Hum apne 5 friends ka sum he to hame achha dost banana chahiye
Thank you ❤
Apbahat achha kam karrahehe❤❤
Day 6 complete
Thank you
choti choti adato se bade lakshya hasil ho sakate hai
acchi adate apanao, buri adate chod do
Book summary is amazing very shortly explain all this and this is really good and informative just only 1 % this will compunded and return to yu…just watch your thoughts and habbit